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Sunday, 29 January 2012

हां, मैंने हवाई जहाज का अपहरण किया- हाशिम कुरेशी


हाशिम कुरेशी के साथ संजीव चौहान
ये फोटो हैं मो. हाशिम कुरेशी की। ये फोटो अक्टूबर 2011 में उस वक्त मैंने लीं, जब हाशिम कुरेशी की जेल-डायरी की शूटिंग के लिए मैं उनके घर निशात, शालीमार (श्रीनगर, कश्मीर) पर गया था। हाशिम साहब से दो राउंड में करीब पांच घंटे मेरी बातचीत हुई। इस बातचीत में हाशिम साहब ने बचपन से लेकर और अब तक की अपनी ज़िंदगी बयां की। बे-खौफ, बेफिक्र होकर। इस लंबी बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे पहली बार वे महज 11 साल की उम्र में ही रात भर थाने की हवालात में बंद रहे। इसके बाद 1971-72 में उन्होंने रिश्ते में अपने एक भाई के साथ इंडियन एअरलाइंस का हवाई जहाज "गंगा" का अपहरण कर लिया। इस हवाई-जहाज में मय क्रू मेम्बरान के करीब 30 लोग सवार थे। ये हवाई जहाज जम्मू से श्रीनगर की उड़ान पर था। उसी वक्त हाशिम और उनके भाई अशरफ ने हवाई जहाज के पायलट और को-पायलट को काबू कर लिया। दोनो भाईयों के हाथों में हथगोले और हथियार थे।

 अपहरण की योजना मकबूल भट्ट ने बनाई थी। और उसे अमल में लाये, हाशिम और अशरफ। अपहरण के बाद "गंगा" को लाहोर (पाकिस्तान) ले जाया गया। वहां जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को अपहरण की ह़कीकत पता चली, तो उसने खिसियाकर हवाई जहाज "गंगा" में आग लगवा दी।

दोनो अपहरणकर्ताओं पर पाकिस्तान में मुकदमा चला। सजा हुई। करीब नौ साल हाशिम कुरेशी पाकिस्तान की जेलों में क़ैद रहे। इसके अलावा कई अन्य देशों सहित भारत की दिल्ली में मौजूद तिहाड़ जेल में भी बंद रहे। हाशिम के भाई और "गंगा" के सह-अपहरणकर्ता अशरफ को पाकिस्तान में ही शरण मिल गयी।

पाकिस्तानी हुक्मरानों ने हाशिम कुरेशी को भी पाकिस्तान में बसकर भारत के खिलाफ काम करने को कहा। मोटी रकम का लालच भी दिया। लेकिन हाशिम कुरेशी किसी तरह भारत भाग आये। 


हाशिम के मुताबिक जेलों में उन्होंने गीता, महाभारत भी पढ़े। और समझा कि पंडित, मौलवी की बातों में आने से बचें। ये अशांति फैलाने का काम करते हैं। कोई भी धर्म किसी को खून-खराबे की इजाजत नहीं देता। फिलहाल हाशिम कुरेशी श्रीनगर (कश्मीर) में "निशात", शालीमार में परिवार के साथ खुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के नेताओं द्वारा अपनी जा रही गलत, स्वार्थपूर्ण नीतियों को कोसते हुए। 

Friday, 8 July 2011

बाबू जी.....मेरे साथ बलात्कार कर लो!


लीजिए बलात्कार का "वाज़िब ह़क"

दुनिया में हम सबसे बड़े लोकतंत्र के मठाधीश हैं। यानि संसार में भारत इकलौता ऐसा देश है, जिसकी लोकतांत्रिक व्यव्स्था, दुनिया के लिए उदाहरण है।  हमारी ताकत के आगे हमारे इर्द-गिर्द बसे बाकी तमाम मुल्कों की सल्तनत के छक्के छूटते हैं। हम परमाणु-ताकत रखते हैं। दुनिया की सुपर-पॉवर अमेरिका भी हमारी ताकत का गाहे-बगाहे, काल-पात्र-समय का ध्यान रखकर तारीफ कर देती है। हमारे आत्म-संतोष के लिए भला हमें इससे ज्यादा चाहिए भी क्या? अमेरिका ने तारीफ कर दी।  हम फूलकर गोल-गप्पा हो गये। भले ही हमारा पड़ोसी देश चीन, हमारी छाती पर दबे पांव रोज चहल-कदमी कर रहा हो।
जरा सोचिये। दुनिया के इतने ताकतवर देश में बलात्कार की कीमत तय कर दी जाये। तो इसे क्या कहेंगे। लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा, या फिर सरकारी तंत्र में बढ़ती नपुंसकता का इशारा। जो भी समझ लीजिए। हमारा देश लोकतांत्रिक देश है। यहां किसी के सोचने पर पाबंदी नहीं लगाई जाती। सोचने की आजादी सबको है। चाहे मनमोहन सिंह, सोनिया, कपिल सिब्बल हों। चाहे दिल्ली में तिलक मार्ग की लालबत्ती पर कटोरा लेकर भीख मांगने वाली, फटे कपड़ों में मई-जून की गर्मी में पसीने से चुचुहाती, अधनंगी गरीब महिला। अपने हिसाब से सोचने के लिए सब फ्री हैं। क्योंकि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं।
खबरों के मुताबिक पिछले दिनों केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जबाब दाखिल किया है। इस जबाब में सरकारी हुक्मरानों ने जो लिखा है, आप भी पढ़ लीजिए :
"देश में बलात्कार पीड़िता को अधिकतम तीन लाख रुपये मुआवजा दिये जाने की स्कीम को अंतिम रुप दे दिया गया है। इसके लिए देश भर में डिस्ट्रिक्ट क्रिमिनल इंज्यूरी रिलीफ एंड रिहेबिलेशन बोर्ड बनेगा। जिला स्तर पर इस बोर्ड के चेयरमैन जिलाधिकारी (डीएम) होंगे।  जिले के एसपी यानि पुलिस-अधीक्षक, सिविल-सर्जन, चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी, इस बोर्ड के सदस्य होंगे। इस जिला स्तर के बोर्ड की निगरानी के लिए राज्य स्तर का भी एक बोर्ड बनेगा। 
स्कीम के तहत थाने का एसएचओ 72 घंटे के भीतर बलात्कार की घटना की प्राथमिक जांच रिपोर्ट जिला बोर्ड के हवाले करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तरीय बोर्ड, बलात्कार पीड़िता को 20 हजार से 50 हजार रुपये का भुगतान करायेगा। अदालत में बयान दर्ज होने के बाद पीड़िता को 2 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिये जायेंगे। अगर बयान दर्ज नहीं हुआ और केस साल भर से लंबित (पेंडिंग)पड़ा है, तो भी बलात्कार पीड़िता को 2 लाख का मुआवजा पाने का ह़क होगा।
विशेष परिस्थितियों में ये रकम 3 लाख भी हो सकती है। बलात्कार के बाद अगर पीड़िता को एड्स की बीमारी हो जाये, पीड़िता नाबालिग या मानसिक रुप से कमजोर हो या बलात्कार के बाद वो गर्भवती हो गयी हो, तो भी मुआवजा राशि 3 लाख रुपये होगी। ये मुआवजा राशि अदालत द्वारा किये जाने वाले जुर्माने से अलग होगी। "
ऊपर लिखी इबारत पढ़ने के बाद भी क्या कोई सवाल या किसी सवाल के जबाब की चाहत जेहन में बाकी बची है ? मेरे हिसाब से नहीं। सब-कुछ साफ है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में जिसके साथ बलात्कार होगा, उसे मुआवजा मिलेगा। अब तक रेल, हवाई-जहाज, सड़क हादसा, भूकम्प, अग्निकांड में मरने वालों को मुआवजा मिलता था। देखा या भोगा तो कभी नहीं, लेकिन सुना अक्सर है, कि बलात्कार पीड़िता एकदम तो मरती नहीं है।  जब तक जीती है, तिल-तिलकर हर-लम्हा मरती है। लेकिन उसे जीते-जी ही बलात्कार का मुआवजा मिलेगा । ये कभी नहीं देखा-सुना था।  बताईये! कितनी खुशी की बात है! हमें-आपको ये बलात्कार का बाजिब मुआवजा लेने-देने, देखने-सुनने में बुरा लग सकता है। सरकार को भला इस सबसे क्या सरोकार!
बलात्कार सरकार का तो होता नहीं है। बलात्कार तो औरत-लड़की का होता है। जब बलात्कार लड़की-औरत का हो रहा है, तो फिर दर्द  सरकार को क्यों होगा?  सरकार तो सरकार है। कोई मेरी-आपकी तरह हाड़-मांस का चलता-फिरता पुतला थोड़े ही न। सरकार तो कागज और फाइलों पर चलती है। भला कागज और फाइल के कैसा दर्द? अब सरकार को ही कोसने से भला क्या हासिल होने वाला है? बलात्कार का मुआवजा बांधने पर।
 दो वक्त की रोटी के लिए, जिस देश में एक-दूसरे के खून के प्यासे हों। रिश्तों को तार-तार किया जा रहा हो। पेट की भूख शांत करने के लिए,  जिस देश में मां 50 रुपये में जिगर के टुकड़े को बेच देती हो। गरीबी और पेट की खातिर। जिस देश में बेटी की इज्जत देहरी पर पहरेदारी करके खुद मां, नीलाम कराने को मजबूर हो। उस देश में अगर बलात्कार का मुआवजा 20 हजार से 3 लाख तक का सरकार खुद दिलवा रही हो। तो  इससे ज्यादा सहयोगी या मददगार, गरीबों की मसीहा सरकार भला कहां मिलेगी!
 इस स्कीम को सरकार का अहसान मानना चाहिए! देश की उन गरीब मां-बेटियों को, जो गरीबी के चलते पेट की भूख शांत करने के लिए, अपनी इज्जत का सौदा कर रही हैं। चंद रुपयों में ।अहसान इसलिए कि अब तक बलात्कार तो होता था, लेकिन उसका मुआवजा नहीं मिलता था। उम्मीद है कि वो दिन अब दूर नहीं होगा, जब गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिए मां-बेटी शर्म-लिहाज छोड़कर, खुद ही  सड़क चलते कहने लगेंगी- बाबू जी- मेरे साथ बलात्कार कर लीजिए। बलात्कार का बाजिव ह़क यानि 20 हजार से 3 लाख तक का मुआवजा पाने के लिए। चलिये दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में किसी को तो याद आयी।
 बलात्कार का बाजिव ह़क दिलाने की बात। इस नेक कार्य के लिए धन्यवाद? दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का !